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Tuesday, 08 September 2026
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बच्चियों की पहली कमाई, बनी दूसरों की आशा: 7 और 6 वर्षीय बहनों ने workshop की कमाई flood victims को donate की, CM Mann ने की सराहना

अमृतसर की दो नन्ही बच्चियों ने ऐसा काम किया है जिसने पूरे पंजाब का दिल जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चों के लिए खिलौने, चॉकलेट और नए कपड़े सबसे बड़ी खुशी होते हैं, उसी उम्र में 7 साल की मोक्ष सोई और 6 साल की श्रीनिका शर्मा ने कुछ अलग सोचकर अपना छोटा-सा योगदान पंजाब की बाढ़ से जूझ रहे लोगों को समर्पित कर दिया।

इन दोनों बहनों ने अपने छोटे-छोटे हाथों से क्रोशिया (crochet) की मदद से खूबसूरत चीजें बनाईं—जैसे छोटे बैग, टेबल मैट, ब्रेसलेट, वॉलीट और डेकोरेटिव आइटम। उन्होंने इन चीजों की एक प्रदर्शनी लगाई, जिसका नाम था “Crochet of Kindness” (दयालुता की बुनाई)। यह सिर्फ उनकी आर्ट दिखाने के लिए नहीं थी, बल्कि एक मकसद के लिए थी—दूसरों की मदद करना

कमाई दान करने का बड़ा दिल

जैसे ही वर्कशॉप और प्रदर्शनी खत्म हुई, मोक्ष और श्रीनिका ने अपनी सारी कमाई एक-एक रुपये तक पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद में दान कर दी। यह कमाई उनके लिए पहली “earn money” थी, लेकिन उन्होंने इसे अपने पास रखने की जगह उन लोगों को दे दिया, जिन्हें आज इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

CM भगवंत मान ने की तारीफ

इन बच्चियों के निःस्वार्थ काम की चर्चा जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तक पहुँची, तो उन्होंने तुरंत इन्हें मिलने के लिए बुलाया।
मान ने बच्चियों से मिलकर कहा कि—

इतनी छोटी उम्र में दूसरों का दर्द समझना और उसके लिए कुछ करना, यह पंजाब की असली भावना है। ये दो बच्चियाँ हमें सिखा रही हैं कि इंसानियत क्या होती है।

उन्होंने दोनों बच्चियों को आशीर्वाद दिया और उनके माता-पिता की भी तारीफ की कि उन्होंने अपने बच्चों में इतना अच्छा संस्कार डाला।

मिशन चढ़दीकला की सच्ची मिसाल

पंजाब इस समय भयंकर बाढ़ के बाद फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा है। लोग अपने टूटे घरों को जोड़ने में लगे हैं, खेतों में दोबारा बीज बोने की उम्मीद कर रहे हैं। सरकार और कई संगठन बाढ़ राहत के काम में जुटे हुए हैं। इन सबके बीच मोक्ष और श्रीनिका जैसा योगदान मिशन चढ़दीकला को और मजबूती देता है।
यह मिशन पंजाब की उस ताकत का प्रतीक है, जिसमें कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद और हिम्मत बनी रहती है।

समाज के लिए एक संदेश

इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि यह बताती है—

  • दया करने के लिए उम्र नहीं देखी जाती
  • मदद छोटे हाथों से भी हो सकती है
  • बड़ा दिल होना किसी उम्र का मोहताज नहीं

जब दो नन्ही बच्चियाँ अपनी पहली कमाई दान कर सकती हैं, तो हम जैसे बड़े लोग क्या नहीं कर सकते?

पंजाब को आज हमारी जरूरत है

बाढ़ से प्रभावित परिवार अभी भी अपनी जिंदगी दोबारा खड़ी करने की कोशिश में हैं। उन्हें घर, कपड़े, खाना और रोजमर्रा की जरूरतों में मदद चाहिए।
मोक्ष और श्रीनिका ने एक मिसाल पेश कर दी है। अब जरूरत है कि हम सब भी इंसानियत का हाथ बढ़ाएं, ताकि पंजाब अपने दर्द से उभरकर फिर से मजबूती से खड़ा हो सके।

इन बच्चियों ने दिखा दिया कि असली ताकत इस बात में नहीं है कि हमारे पास क्या है, बल्कि इस बात में है कि हम क्या दे सकते हैं। उनकी दयालुता और मासूमियत आने वाले समय में कई लोगों को प्रेरित करेगी।

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