जुलाई में SGPC सेक्रेटरी के अकाउंट से बहरीन की महिला के अकाउंट में ₹1 लाख ट्रांसफर किए गए, हरजिंदर धामी बताएं कि संगत का पैसा कहां खर्च हुआ: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के जनरल सेक्रेटरी और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेताओं सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ-साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी की सराय में रह रही एक बहरीन की महिला के आरोपों पर लगातार चुप्पी पर सवाल उठाया। बलतेज पन्नू ने कहा कि वह इस मामले पर पहले ही करीब चार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं, लेकिन सिख समुदाय के उठाए गए सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिला है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबोधित करते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “हरसिमरत कौर बादल महिलाओं के मुद्दों पर प्रोग्राम और रैलियों में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन एक महिला के महीनों तक एसजीपीसी की साड़ी में रहने से जुड़े आरोपों पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। वह इन सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही हैं? जब एक महिला के साथ हुए बर्ताव और एसजीपीसी के रिसोर्स के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं, तो चुप्पी क्यों है?”
बलतेज पन्नू ने कहा, “बिक्रम सिंह मजीठिया भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय वीडियो जारी कर रहे हैं, जहां उन्हें पत्रकारों के सवालों का सामना करना पड़ेगा। अगर बिक्रम सिंह मजीठिया के पास जवाब हैं, तो उन्हें मीडिया के सामने आकर सवालों का जवाब देना चाहिए।”
हरजिंदर सिंह धामी पर सवाल उठाते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “धामी साहब ने मीडिया का सामना करने के बजाय एक वीडियो भी जारी किया है। आज जब पटियाला में मीडिया ने उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने फिर कहा कि वह इस मामले पर कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि वह वहां किसी और काम से आए थे। हरजिंदर सिंह धामी कब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इन सवालों का जवाब देंगे?”
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “यह कोई साधारण राजनीतिक विवाद नहीं है। एक एसजीपीसी संगठन, एसजीपीसी के रिसोर्स और जिस तरह से एक महिला को महीनों तक वहां रखा गया, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सिख समुदाय को सवाल पूछने और साफ जवाब पाने का पूरा हक है।”
बलतेज पन्नू ने एसजीपीसी द्वारा बनाई गई चार सदस्यों वाली जांच कमेटी पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैंने अपनी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यह सवाल उठाया था कि जूनियर लोग सीनियर लोगों से कैसे पूछताछ करेंगे?”
उन्होंने कहा, “महिला ने कहा है कि उसने हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर सिंह बादल को सब कुछ बता दिया था। क्या यह कमेटी हरजिंदर सिंह धामी से पूछताछ करेगी? क्या यह सुखबीर सिंह बादल से पूछताछ करेगी? क्या यह जांच करेगी कि उन्हें क्या पता था, उन्हें कब पता चला और क्या कार्रवाई की गई?”
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “अगर एसजीपीसी सच में बिना किसी भेदभाव के जांच चाहती है, तो यह काम अनुभवी लोगों को देना चाहिए। किसी रिटायर्ड सिख जज या रिटायर्ड सीनियर पुलिस अधिकारी से जांच करने को कहा जा सकता था। ये जूनियर मेंबर न तो कानून के माहिर हैं और न ही प्रशासन के। बिना किसी स्वतंत्र और अनुभवी जांच के, सीनियर लोगों से जुड़े मामले में सही जांच कैसे हो सकती है?”
बलतेज पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी ने जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया है, लेकिन सवाल उठाया कि क्या यह कदम सिर्फ मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने कमेटी को 15 दिन का समय दिया है। क्या यह सोचा जा रहा है कि 10 या 15 दिन बाद मामला पीछे छूट जाएगा और लोग इसे भूल जाएंगे? लोग इस मुद्दे को नहीं भूलेंगे। पूरी दुनिया में सिख समुदाय इस बारे में बात कर रहा है और पंजाबी मीडिया चैनलों द्वार भी इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही हैं।
“15 दिन बाद भी सवाल कायम रहेंगे। 10 दिन बाद भी रहेंगे और 10 महीने बाद भी रहेंगे जब तक सही जवाब नहीं मिल जाते।”
बलतेज पन्नू ने सवाल किया, “इस महिला को एसजीपीसी सराय में कौन लाया? उसे महीनों तक वहां क्यों रखा गया? उसे रहने की जगह और सुविधाएं किसने दीं? इनके लिए पैसे किसने दिए? सरबजीत सिंह झिंजर का क्या रोल था? विरसा सिंह वल्टोहा का क्या रोल था? ये बेसिक सवाल हैं और एसजीपीसी को इनके जवाब देने चाहिए।”
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “यह मामला खास तौर पर गंभीर है क्योंकि इसमें शामिल सराय, गाड़ी, ड्राइवर और सेवादार एसजीपीसी से संबंधित थे। अगर एसजीपीसी के रिसोर्सों का इस्तेमाल हुआ है, तो एसजीपीसी को सिख संगत के सामने पूरा खर्च रखना चाहिए।”
बलतेज पन्नू ने मामले में नया खुलासा करते हुए कहा, “23 जुलाई, 2026 को पंजाब नेशनल बैंक में एसजीपीसी सेक्रेटरी के नाम पर खोले गए अकाउंट से ₹1 लाख एक बहरीन की महिला के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे। यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद से दिए गए थे?” इस पेमेंट को किसने मंज़ूरी दी? यह पैसा किस हेड में ट्रांसफर किया गया? एसजीपीसी को इन सवालों के जवाब देने चाहिए।”
बलतेज पन्नू ने पूछा, “क्या इससे बड़ा कोई सबूत हो सकता है? एफआईआर खुद एक बड़ा सबूत थी, लेकिन किसी ने उन सवालों के जवाब नहीं दिए। अब यह एसजीपीसी के अकाउंट से उस महिला के अकाउंट में ट्रांसफर है जिसने आरोप लगाया था। यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद के लिए दिए गए थे?”
बलतेज पन्नू ने कहा, “यह सिर्फ़ एक ट्रांसफर है। बाकी पेमेंट का क्या? कैश खर्च का क्या? उसके रहने, खाने, घूमने और दूसरी सुविधाओं पर हुए खर्च का क्या? गाड़ी एसजीपीसी ने दी थी, उसका फ्यूल एसजीपीसी ने दिया था, ड्राइवर को एसजीपीसी ने दिया था और सेवादार एसजीपीसी के कर्मचारी थे। इसके अलावा, अगर उसे पर्सनल खर्च के लिए भी पैसे दिए जा रहे थे, तो उन आठ महीनों के पूरे खर्च का हिसाब दिया जाना चाहिए।”
बलतेज पन्नू ने मांग की कि एसजीपीसी महिला के रहने से जुड़े पूरे खर्च का खुलासा करे और बताए कि हर पेमेंट की किसने मंज़ूरी दी थी।
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “सिख संगत अपनी मेहनत की कमाई एसजीपीसी को श्रद्धा और भावना से दान करती है। एक आम सिख परिवार एक बार में सिर्फ़ ₹10 या ₹20 ही दे सकता है। अगर आप ₹10 का योगदान गिनें, तो ₹1 लाख का मतलब है 10,000 लोग जिन्होंने श्रद्धा से गोलक में अपना पैसा डाला होगा। वह पैसा इस तरह किसी के अकाउंट में कैसे ट्रांसफर हो सकता है? एसजीपीसी को जवाब देना होगा। यह सिख संगत का पैसा है और हर रुपये की पूरी जवाबदेही होनी चाहिए।”
उन्होंने एसजीपीसी संस्थाओं के बड़े पैमाने पर कामकाज पर भी सवाल उठाए। “लोगों ने पिछले कुछ सालों में अलग-अलग एसजीपीसी संस्थाओं के खर्च और कामकाज से जुड़े आरोप और विवाद सुने हैं, जिसमें सूखी रोटी का मुद्दा, कोविड के दौरान सब्जी का मुद्दा और बिल्डिंग का मुद्दा शामिल है। लेकिन इस मुद्दे ने खास तौर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि जिस सुविधा की बात हो रही है, वह सीधे एसजीपीसी के कंट्रोल में थी। इसका जवाब सिर्फ यह नहीं हो सकता कि एक जांच कमेटी बना दी गई है। सिख समुदाय जानना चाहता है कि फैसले किसने लिए, खर्च को किसने मंजूरी दी और दी गई सुविधाओं के लिए कौन जिम्मेदार था।”
बलतेज पन्नू ने एसजीपीसी पर राजनीतिक प्रभाव पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “हरजिंदर सिंह धामी ने खुद को सार्वजनिक रूप से सुखबीर सिंह बादल का ‘सिपाही’ बताया है। इसलिए आज सवाल साफ है: क्या हरजिंदर सिंह धामी एसजीपीसी के संसाधनों के इस्तेमाल और महिला के रहने के बारे में उठ रहे सवालों का जवाब देंगे?”
उन्होंने कहा, “सुखबीर सिंह बादल को भी यह साफ़ करना चाहिए कि उन्हें इस मामले के बारे में क्या पता था। अगर महिला कहती है कि उसने सुखबीर सिंह बादल को सब कुछ बताया था, तो सुखबीर सिंह बादल को मीडिया के सामने आकर अपनी बात साफ़ करनी चाहिए।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “ये संस्थाएं कुर्बानियों से बनी हैं। दुनिया भर की सिख कम्युनिटी इनमें अपना योगदान देती है। वे इसलिए योगदान नहीं देते कि आप एक महिला को एसजीपीसी सराय में ले आएं, उसे आठ महीने तक वहां रखें, उसे परेशान करें और कम्युनिटी को कोई यह भी न बताए कि उसे वहां क्यों और किस मकसद से रखा गया था। सिख कम्युनिटी को यह जानने का हक है कि उसकी संस्थाएं कैसे चल रही हैं। उसे यह जानने का हक है कि उसका पैसा कैसे खर्च हो रहा है। किसी को भी कम्युनिटी के योगदान को पर्सनल या राजनीतिक रिसोर्स के तौर पर इस्तेमाल करने का हक नहीं है।”
बलतेज पन्नू ने उन लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने उनके मुताबिक, महिला की यात्रा का प्रबंध किया और उसे पंजाब लाया। “उसके ट्रैवल का इंतज़ाम किसने किया? उसे पंजाब कौन लाया? उसे किसने रिसीव किया? उसके रहने का इंतज़ाम किसने किया? एसजीपीसी स्टाफ़ को किसने इंस्ट्रक्शन दिए? इन सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुखबीर बादल को बताना चाहिए कि उन्हें क्या पता था। हरजिंदर सिंह धामी बताएं कि वह क्या जानते थे। उसके यात्रा और ठहरने का इंतज़ाम करने वालों से भी पुछताछ होनी चाहिए। सिख संगत जो कुछ हुआ, उसका पूरा हिसाब लेने की हकदार है।
बलतेज पन्नू ने सवाल किया, “11 साल से एसजीपीसी के चुनाव क्यों नहीं हुए? सिख संगत को अपने प्रतिनिधि चुनने से क्यों दूर रखा जा रहा है? ये वो सवाल हैं जो सिख संगत और सिख बुद्धिजीवियों को पूछने चाहिए,”
पन्नू ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने भाजपा के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत वह एसजीपीसी पर अपना कंट्रोल बनाए रखते हुए विधानसभा चुनाव के लिए कम से कम सीटों की मांग करेगी। उन्होंने कहा, “सिख संगत और सिख बुद्धिजीवियों को पूछना चाहिए कि संस्था कैसे चल रही है और इसके फंड का इस्तेमाल कैसे हो रहा है। ये संस्थाएं सिख संगत की हैं, किसी व्यक्ति या राजनीतिक परिवार की नहीं।”
उन्होंने कहा, “आज धामी साहिब फिर सवालों से भाग गए। उन्होंने जवाब नहीं दिए। वह सोचते होंगे कि अगर वे 10 या 15 दिन जवाब नहीं देंगे, तो लोग भूल जाएंगे। लोग नहीं भूलेंगे। सुखबीर बादल और हरजिंदर सिंह धामी को इन सवालों का सामना करना पड़ेगा। सिख संगत जवाब मांगती रहेगी। सिर्फ जांच कमेटी को 15 दिन देने से यह मामला खत्म नहीं होगा।”
बलतेज पन्नू ने दोहराया कि एसजीपीसी को महिला के रहने, उसके रिसोर्स के इस्तेमाल, ₹1 लाख के कथित ट्रांसफर और इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन सभी की भूमिका का पूरा हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “सिख समुदाय सवाल पूछ रहा है। वीडियो बनाने, पत्रकारों से बचने और 15 दिन इंतजार करने के बजाय, जिम्मेदार लोगों को मीडिया के सामने आकर हर सवाल का जवाब देना चाहिए।”


