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Thursday, 15 October 2026
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PM मोदी का आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन, महिला आरक्षण बिल पर रख सकते हैं बात

PM नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात एक बार फिर राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे. उनका संबोधन रात 8.30 बजे होगा. माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल पर बोल सकते हैं और वह विपक्ष की ओर से सहयोग नहीं किए जाने को लेकर उस पर निशाना साध सकते हैं. इससे पहले 2 दिन चली बहस के बाद विपक्ष की ओर से विरोध में वोट डालने की वजह कल शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था.

महिला आरक्षण को साल 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद वोटिंग के दौरान लोकसभा में खारिज होने के अगले दिन आज शनिवार को जमकर बयानबाजी का दौर रहा. विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला.

पक्ष-विपक्ष में बिल को लेकर घमासान

बीजेपी ने विधेयक के खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया. जबकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगियों ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में तुरंत लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है.

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को पूरे देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अपनी ‘विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है.’ उन्होंने कहा, “उन्हें देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा. कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग की तरह है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे. यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था और इसमें किसी को कैसे आपत्ति हो सकती थी?”

महिला सशक्तिकरण को कमजोर कियाः शोभा

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के कदम ने महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने फैसले से दक्षिण भारत को भी नुकसान पहुंचाया, जहां सीटों में 50 फीसदी से अधिक वृद्धि हो रही थी. महिलाओं को आरक्षण मिलने जा रहा था, लेकिन उन्हें इस सुनहरे अवसर से वंचित कर दिया गया. यह सब राहुल गांधी की अगुवाई में हुआ है.”

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया. वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और इसके क्रियान्वयन में देरी कर रही है.

संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को मिली मातः प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था, इसका गिरना संविधान और विपक्षी एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है. उन्होंने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल प्रभाव से इसे लागू कर सकती है, यदि वह ऐसा करती है तो पूरा विपक्ष इसका समर्थन करेगा. उन्होंने कहा कि कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जीत है, विपक्षी एकता के जरिए संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को हराया गया.

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है. उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और हम शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते. हमारी आपत्ति महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी.”

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था. फिर इसमें संशोधन लाने की क्या जरूरत थी? जब आपके पास दो-तिहाई बहुमत ही नहीं था, तो इसे लाने का क्या मतलब था? इससे साफ है कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद था.”

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