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Sunday, 26 July 2026
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मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामला समाप्त होना दर्शाता है कि आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं सके: Kultar Singh Sandhwan

पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि आबकारी नीति मामले में माननीय न्यायालय का हालिया निर्णय संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन की सशक्त पुनर्पुष्टि है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामलों को निरस्त किया जाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रचारित आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं सके।

 

स्पीकर संधवां ने कहा, “जब लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री का नाम बिना ठोस साक्ष्य के लिया जाता है और जांच एजेंसियां प्रथम दृष्टया भी कोई मामला स्थापित करने में असमर्थ रहती हैं, तो यह संस्थागत शुचिता और विधिसम्मत प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के संबंध में न्यायालय का निर्देश हमारे संवैधानिक ढांचे में जवाबदेही की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है।”

 

निर्णय के व्यापक राजनीतिक और नैतिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए स्पीकर संधवां ने कहा, “अरविंद केजरीवाल केवल बरी ही नहीं हुए, बल्कि सत्य सिद्ध होकर उभरे हैं। जमीनी संघर्षों से तपे हुए नेता के रूप में उन्होंने सदैव आम नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया है। वे आधुनिक दृष्टि के दूरदर्शी नेता हैं, जो पारदर्शिता, जनसेवा और सहभागी लोकतंत्र पर आधारित ‘जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए’ शासन की अवधारणा को साकार करते हैं।”

 

उन्होंने आगे कहा, “यह फैसला इस धारणा को मजबूत करता है कि उन्हें बदले की राजनीति का शिकार बनाया गया, किंतु साथ ही यह एक बड़े सत्य की पुष्टि भी करता है—संवैधानिक लोकतंत्र में सत्य की विजय होती है और ईमानदारी भय और दबाव के बावजूद अडिग रहती है। अरविंद केजरीवाल का संघर्षपूर्ण सफर उनकी दृढ़ता, नैतिक साहस और जनता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अंततः जब न्याय की विजय होती है, तभी लोकतंत्र सशक्त होता है, और यह निर्णय उसी शाश्वत सिद्धांत का प्रमाण है।”

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