Live
CBI ने कई जगहों पर रेड की लेकिन एक भी सुराग नहीं मिला, यह आप की ‘कट्टर ईमानदारी’ साबित करता है: कुलदीप सिंह धालीवाल•मोदी की CBI ने भी हमारी सरकार की ईमानदारी को दिया क्लीन चिट- भगवंत सिंह मान•भगवंत मान सरकार ने ट्रिपल एच स्क्रीनिंग को ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ पहल का हिस्सा बनाया•भगवंत मान को 100 से ज्यादा सीटें जीता कर पंजाबी देंगे भाजपा को धक्केशाही का जवाब- केजरीवाल•भाजपा ने हमेशा पंजाबियों के साथ धक्का किया- भगवंत सिंह मान•आम आदमी पार्टी देश भर में वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन के साथ- केजरीवाल•कोऑर्डिनेशन कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब के एतराज़ों पर किया विचार-विमर्श, व्यापक सहमति बनाने की कोशिश•SGPC किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिख संगत की है: बलतेज पन्नू•CBI ने कई जगहों पर रेड की लेकिन एक भी सुराग नहीं मिला, यह आप की ‘कट्टर ईमानदारी’ साबित करता है: कुलदीप सिंह धालीवाल•मोदी की CBI ने भी हमारी सरकार की ईमानदारी को दिया क्लीन चिट- भगवंत सिंह मान•भगवंत मान सरकार ने ट्रिपल एच स्क्रीनिंग को ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ पहल का हिस्सा बनाया•भगवंत मान को 100 से ज्यादा सीटें जीता कर पंजाबी देंगे भाजपा को धक्केशाही का जवाब- केजरीवाल•भाजपा ने हमेशा पंजाबियों के साथ धक्का किया- भगवंत सिंह मान•आम आदमी पार्टी देश भर में वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन के साथ- केजरीवाल•कोऑर्डिनेशन कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब के एतराज़ों पर किया विचार-विमर्श, व्यापक सहमति बनाने की कोशिश•SGPC किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिख संगत की है: बलतेज पन्नू•
Wednesday, 07 October 2026
Menu

केंद्र सरकार डील करते समय कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखना चाहिए: मनप्रीत सिंह इयाली

आज अकाली दल वारिस पंजाब की ओर से बापू तरसेम सिंह खालसा और वरिष्ठ नेता सरदार मनप्रीत सिंह इयाली ने संयुक्त बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील में कृषि उत्पादों को डील से बाहर रखा जाए। उन्होंने कहा कि इस ट्रेड डील की अंतिम समय-सीमा 24-07-2026 है और केंद्र सरकार इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उतावली दिखाई दे रही है, जबकि यह ट्रेड डील किसानों के लिए बेहद घातक साबित होगा और उन्हें आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाएगा।

अपने बयान में सरदार मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि अमेरिका पिछले आठ दशकों से भारत पर अपने कृषि क्षेत्र को अमेरिकी व्यापार के लिए खोलने का दबाव बनाता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब मौजूदा केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी आयात का रास्ता खोलने का मन बना लिया है और इस संबंध में वाणिज्य मंत्रालय भी अपनी मंजूरी दे चुका है। उन्होंने कहा कि 24-07-2026 से पहले किसी भी समय इस समझौते पर हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है, जिसका सबसे अधिक नुकसान भारत के किसानों, विशेषकर पंजाब की खेती और किसानों को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद अमेरिका से डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री उत्पाद, कपास, सोयाबीन, मक्की के पाउडर तथा अन्य दालों और सब्जियों का बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में आयात होगा। इससे भारतीय बाजार में इन वस्तुओं की कीमतें गिर जाएंगी और किसानों की फसलें मंडियों में रूल जाएंगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है। यहां तक कि वहां एक गाय के चारे के लिए प्रतिदिन तीन अमेरिकी डॉलर तक की सहायता दी जाती है और कपास उत्पादकों को सालाना एक लाख डॉलर तक की सब्सिडी मिलती है। इसके विपरीत भारत में किसानों को मिलने वाली सहायता बेहद सीमित है।

उन्होंने कहा कि चिंता का विषय यह भी है कि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर नाममात्र के आयात शुल्क लगाए हुए हैं, जबकि अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाता है। ऐसे में भारतीय किसानों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जो उनके लिए बेहद नुकसानदायक साबित होगा।

बापू तरसेम सिंह खालसा ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौते से पहले देश के अन्नदाता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसानी है और इस ट्रेड डील का सबसे अधिक नुकसान पंजाब के किसानों को झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों के संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और राज्यों से व्यापक विचार-विमर्श किए बिना सरकार को ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि इस ट्रेड डील के बाद अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय कृषि क्षेत्र में प्रवेश करेंगी और जीएमओ (GMO) बीजों को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय कृषि की मौजूदा रूप रेखा बदल जाएगी और नई बीमारियों, नए कीटों तथा रासायनिक उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ेगा।

दोनों नेताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार इस डील के संबंध में किसानों को स्पष्ट जानकारी दे और कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखे। उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए इस विषय पर अमेरिका को स्पष्ट रूप से इनकार कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस समझौते को लागू करने पर अड़ी रहती है तो अकाली दल वारिस पंजाब किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल होकर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी तथा किसान और मजदूर संगठनों को हर प्रकार का सहयोग प्रदान करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *