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Monday, 07 September 2026
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Punjab में Drug Trade पर बड़ा Revelation: DSP ने High Court में दायर की याचिका, कहा – Government 300 से ज्यादा NDPS Cases की जांच को ‘जानबूझकर रोक रही’ है

पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब पुलिस के एक मौजूदा डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) वविंदर कुमार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि AlpraSafe नामक सिंथेटिक ड्रग, जिसमें Alprazolam नाम का खतरनाक साइकोट्रॉपिक पदार्थ होता है, पंजाब में भारी मात्रा में बिक रहा है और NDPS एक्ट के तहत दर्ज 300 से ज्यादा केसों की जांच जानबूझकर “कैरीयर लेवल” तक ही सीमित रखी गई है।

कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, फर्जी याचिका होने पर चेतावनी भी दी

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी शामिल हैं, ने पंजाब सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट के नाम पर पर्सनल इंटरेस्ट के लिए दायर की गई है, तो इसे लागत सहित खारिज कर दिया जाएगा।

DSP वविंदर कुमार के आरोप:

  1. सिंथेटिक ड्रग ‘AlpraSafe’ का पूरे पंजाब में बड़ा नेटवर्क
    DSP का कहना है कि Alprazolam से बनी यह ड्रग पूरे राज्य में “भारी मात्रा” में फैल चुकी है। ये ड्रग्स फार्मा कंपनियों की मिलीभगत से फैक्ट्री और गोदामों से निकल कर सड़कों तक पहुंच रही हैं।
  2. 2023 में ही 300 से अधिक FIR, पर जांच सिर्फ कैरियर तक ही सिमटी
    उन्होंने बताया कि 2023 में अकेले 300 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं, लेकिन किसी केस में भी निर्माताओं या बड़ी सप्लाई चेन तक जांच नहीं पहुंची। सभी केस केवल ड्रग्स ले जाने वालों (कैरीयर) की गिरफ्तारी पर खत्म हो गए।
  3. STF में तैनाती के दौरान किया बड़ा खुलासा
    STF (स्पेशल टास्क फोर्स) में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने 20 फरवरी 2024 को FIR नंबर 31 दर्ज की थी, जिसमें Rs 275 करोड़ की नशीली दवाइयां और 765 किलो पाउडर जब्त किया गया। यह ड्रग्स कई बड़ी फार्मा कंपनियों की फैक्ट्रियों और गोदामों से मिले थे।
  4. भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए
    DSP ने दावा किया कि FIR नंबर 23 (22 जनवरी 2023) के मामले में एक फार्मा कंपनी ने एक सीनियर अफसर को 3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी, ताकि जांच को रोका जा सके। वहीं FIR नंबर 31 में Rs 45 लाख की घूस देकर कंपनियों के मालिकों को बचाया गया।
  5. दबाव में ट्रांसफर और फर्जी FIR का आरोप
    DSP वविंदर ने कहा कि जब उन्होंने सीनियर अधिकारियों के कहने पर जांच रोकने से इनकार किया, तो STF से उनका तबादला कर दिया गया और बाद में भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जो दस्तावेज और चिट्ठियां थीं, वो पुलिस के पास हैं और शायद छेड़छाड़ भी की गई है।

DSP खुद भी हैं भ्रष्टाचार केस में आरोपी

सितंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने वविंदर कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने एक फार्मा कंपनी से Rs 45 लाख की रिश्वत ली, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। हालांकि, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज ने CBI को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया और STF को भ्रष्टाचार वाली FIR में आगे की जांच करने से रोक दिया।

राज्य सरकार का जवाब: “यह PIL नहीं, पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन है”

पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील सलिल सबलोक ने कोर्ट में कहा कि DSP की याचिका PIL की आड़ में चल रही व्यक्तिगत लड़ाई है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने जिन 300 FIR का जिक्र किया है, उनमें किसी एक का भी विस्तार से ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसके अलावा DSP खुद एक केस में जांच अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए वह कोर्ट मॉनिटरिंग की मांग नहीं कर सकते

“यह पूरी तरह से व्यक्तिगत हित साधने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही PIL के दुरुपयोग पर चेतावनी दे चुका है।” – सलिल सबलोक

सबलोक ने यह भी बताया कि FIR नंबर 31 की CBI जांच फिलहाल हाईकोर्ट के एकल पीठ के समक्ष लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 8 अगस्त को होनी है।

ड्रग्स, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव की पेचीदा लड़ाई

DSP वविंदर कुमार की याचिका ने पंजाब में ड्रग्स नेटवर्क और पुलिस तंत्र की निष्क्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। जहां एक ओर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें सच्चाई उजागर करने पर सजा दी जा रही है, वहीं सरकार और वकील इसे पर्सनल विवाद बता रहे हैं।

अब सभी की निगाहें 8 अगस्त को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि मामले की CBI जांच आगे कैसे बढ़ेगी और क्या वाकई पंजाब में NDPS एक्ट के केसों में कोई बड़ी साजिश छुपाई जा रही है।

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