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Tuesday, 08 September 2026
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क्या Central Government Punjab के साथ कर रही है Discrimination? Bihar-Gujarat को तुरंत Funds लेकिन Punjab को सिर्फ़1600 Crore के वादे पर अब तक चुप्पी

2025 की भयानक बाढ़ ने पंजाब को पूरी तरह झकझोर दिया था। खेत, घर, सड़कें—सब पानी में समा गए। लाखों एकड़ फसल बर्बाद हुई, सैकड़ों गांव डूब गए और हजारों परिवार बेघर हो गए। हालात इतने खराब थे कि लोगों को घर छोड़कर राहत कैंपों में रहना पड़ा। किसानों ने अपनी सालभर की मेहनत को पानी में बहते देखा, और छोटे दुकानदारों से लेकर मजदूरों तक, हर किसी की जिंदगी ठहर गई।

इसी मुश्किल समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब आए थे। उन्होंने हवाई सर्वे किया और मीडिया के सामने बड़ा ऐलान किया—पंजाब को बाढ़ राहत के लिए 1600 करोड़ रुपये की विशेष सहायता (special financial package) दी जाएगी। उस समय पंजाब के लोगों ने सोचा था कि अब मदद जरूर मिलेगी।

लेकिन आज, महीनों बीत जाने के बाद भी, उस 1600 करोड़ में से एक भी रुपया पंजाब के खाते में नहीं आया है
न कोई आधिकारिक पत्र,
न कोई फंड रिलीज,
न कोई किस्त—एक पैसा भी नहीं।

पंजाब सरकार के मुताबिक मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई बार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को चिट्ठियाँ लिखीं। कई बार reminder भेजे गए। लेकिन हर बार एक ही जवाब मिला—
विचार किया जा रहा है,
प्रक्रिया चल रही है
लेकिन यह “प्रक्रिया” आज तक पूरी नहीं हुई।

उधर दूसरी तरफ, जब बिहार, असम या गुजरात में बाढ़ आती है, तो केंद्र सरकार फौरन पैकेज घोषित करती है और तुरंत पैसा भी ट्रांसफर कर देती है। खासकर उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है, वहां राहत राशि कई बार दोगुनी-तिगुनी तक बढ़ा दी जाती है।
इसी बात से दबे शब्दों में नहीं, बल्कि खुलकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पंजाब को इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि यहां Aam Aadmi Party की सरकार है

केंद्र सरकार के कुछ मंत्री कभी कहते हैं कि 411 करोड़ दे दिए, कभी 480 करोड़, तो कभी 800 करोड़ भेजने का दावा करते हैं। लेकिन पंजाब सरकार और RTI रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य के खजाने में आज तक एक भी रुपया नहीं आया
ऐसे में लोग इसे “press statements का खेल” और “राहत राशि का सिर्फ़ कागज़ी दावा” बता रहे हैं।

पंजाब के लोग इसे सिर्फ़ financial issue नहीं बल्कि regional discrimination यानी क्षेत्रीय भेदभाव बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह राजनीतिक बदले की भावना है—क्योंकि पंजाब बार-बार अपनी बात रख रहा है, सहायता मांग रहा है, मगर केंद्र सरकार चुप्पी साधे हुए है।

यह वही पंजाब है जिसने

  • देश को अनाज दिया,
  • सीमाओं की रक्षा की,
  • सबसे ज़्यादा जवान दिए,
  • और हमेशा देश के साथ खड़ा रहा।

लेकिन अब जब पंजाब खुद संकट में है, तो लोग महसूस कर रहे हैं कि उसे उसके हक की राहत राशि नहीं मिल रही। पंजाब के किसान, मजदूर, दुकानदार और आम परिवार अब भी बाढ़ की चोट से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकारों की राजनीति उनके जख्म और गहरे कर रही है।

पंजाब के राजनीतिक हलकों में एक ही सवाल उठ रहा है—
क्या केंद्र सरकार पंजाब को सज़ा दे रही है?
और यह सवाल अब आम जनता के बीच भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव दूर नहीं हैं। पंजाब के लोग सब देख और समझ रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब माफ नहीं करतापंजाब याद रखता है।

आने वाले चुनावों में यह मुद्दा कितना बड़ा रूप लेगा, यह आने वाला समय बताएगा।

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