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Wednesday, 14 October 2026
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जल विवाद पर पंजाब के हितों की मजबूती से रक्षा कर रही है पंजाब सरकार: CM भगवंत सिंह मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक के दौरान सतलुज–यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद का समाधान आपसी सहमति से निकालने पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार जल विवाद पर राज्य के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारे पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए पानी नहीं है। लेकिन हरियाणा का बड़ा भाई होने के नाते हम पड़ोसी राज्य के साथ वैर-विरोध नहीं चाहते और इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का शीघ्र समाधान चाहते हैं।”

पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि पंजाब के हिस्से के पानी की एक बूंद भी किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि एसवाईएल एक भावनात्मक मुद्दा है और इसके लागू होने की स्थिति में राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात में एसवाईएल नहर के लिए पंजाब के पास भूमि उपलब्ध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र भी चाहते हैं सहमति

पंजाब के दृष्टिकोण को रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब बड़ा भाई है और दोनों राज्य इस संवेदनशील मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए साथ बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार दोनों ही इस विवाद का आपसी सहमति से समाधान चाहते हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।

जल बंटवारे में पंजाब के साथ अन्याय

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब द्वारा किसी को उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि तीन नदियों के कुल 34.34 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से पंजाब को केवल 14.22 एमएएफ (लगभग 40%) हिस्सा मिला है, जबकि 60% पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को जाता है—जबकि इन राज्यों से होकर इन नदियों में से कोई भी नदी नहीं बहती।

गहराता जल संकट

पंजाब में जल संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सतही जल की कमी के कारण भूमिगत जल पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉकों में पानी का अत्यधिक दोहन हो चुका है और भूमिगत जल निकासी की दर देश में सबसे अधिक है।

भाई घनैया जी की भावना का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने भाई घनैया जी की सच्ची भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब अपनी जरूरतों को दरकिनार कर 60% पानी गैर-रिपेरियन राज्यों को देता रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने नदियों का पानी साझा करता है, लेकिन बाढ़ से होने वाला नुकसान अकेले पंजाब को ही झेलना पड़ता है।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ज़ोर

पावन गुरबाणी की पंक्ति ‘पवण गुरु पाणी पिता माता धरत महत॥’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु साहिबान ने वायु को गुरु, पानी को पिता और धरती को माता का दर्जा दिया है। राज्य सरकार इन्हीं शिक्षाओं के अनुरूप प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

संयुक्त वर्किंग ग्रुप का सुझाव

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हाल के इतिहास में यह पहली बार है जब दोनों सरकारें इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत या हार का सवाल नहीं, बल्कि पंजाब और पंजाबियों के हितों और भावनाओं का विषय है। उन्होंने दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच निरंतर बैठकें सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित करने का सुझाव दिया और आशा जताई कि इससे इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा तथा दोनों राज्यों में विकास और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत, जल संसाधन सचिव कृष्ण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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