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Tuesday, 13 October 2026
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‘HAMPTON SKY REALTY LIMITED’ ने आरोपों पर जारी किया विस्तृत बयान

नई दिल्ली में 9 मई 2026 को जारी एक प्रेस बयान में हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने अपने खिलाफ चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा है कि उसे देश के कानूनी और संवैधानिक ढांचे, सरकारी रिकॉर्ड और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

कंपनी के मुताबिक भारत में मोबाइल फोन निर्माण और एक्सपोर्ट सेक्टर को “मेक इन इंडिया” और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। बयान में कहा गया कि भारत का मोबाइल एक्सपोर्ट टर्नओवर वर्ष 2014-15 में करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि उसने मई 2023 में मोबाइल एक्सपोर्ट कारोबार में प्रवेश किया था।

बयान के अनुसार एक्सपोर्ट अवधि के दौरान कंपनी ने 44,471 ब्रांडेड मोबाइल हैंडसेट और एक्सेसरीज का निर्यात किया, जिनमें बड़ी संख्या में एप्पल आईफोन और एयरपॉड्स शामिल थे। कंपनी का दावा है कि हर एक्सपोर्ट की कस्टम अधिकारियों और अन्य स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कई चरणों में जांच की गई। इसमें IMEI स्कैनिंग, OEM कंपनियों द्वारा वेरिफिकेशन और यूएई कस्टम द्वारा जांच शामिल थी।

कंपनी ने यह भी कहा कि हर मोबाइल फोन का एक विशिष्ट 15 अंकों वाला IMEI नंबर होता है, जिसकी जांच एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों के ग्लोबल डेटाबेस के जरिए की गई। कंपनी के अनुसार 16,391 IMEI नंबरों का स्वतंत्र सत्यापन हुआ, जिससे यह साबित होता है कि ये डिवाइस भारत से बाहर एक्टिवेट किए गए थे।

हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने अपने बयान में कहा कि एक्सपोर्ट से प्राप्त हुई पूरी राशि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से मिली और उसका पूरा भुगतान सप्लायर्स को किया गया। कंपनी ने “राउंड ट्रिपिंग” और “फर्जी एक्सपोर्ट” जैसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी रकम विदेश में नहीं रखी गई और न ही किसी व्यक्ति या संस्था को गैरकानूनी तरीके से वापस भेजी गई।

जीएसटी से जुड़ी चिंताओं को लेकर कंपनी ने कहा कि यह मामला कुछ घरेलू सप्लायर्स से संबंधित है और कुल कारोबार का केवल एक छोटा हिस्सा है। कंपनी का दावा है कि उसने सभी भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए और नियमित रूप से जीएसटी रिटर्न दाखिल की। बयान में यह भी कहा गया कि जब कंपनी को सप्लायर स्तर पर गड़बड़ी की जानकारी मिली, तो उसने खुद लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी।

कंपनी ने यह भी दावा किया कि सरकार के खजाने को इस मामले में कोई मौजूदा नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि संबंधित जीएसटी राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है और मामला फिलहाल अपील के अधीन है। बयान के अंत में कंपनी ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और अदालत की प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखती है।

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