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Thursday, 08 October 2026
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हमारे गुरुद्वारे हमारे अस्तित्व का केंद्र हैं, इनका प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए: Kultar Singh Sandhwan

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि सिख संस्थाएं और गुरुद्वारे कौम की सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक पहचान के प्रतीक हैं और यही इसकी असली शक्ति का स्रोत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरुद्वारे हमारे अस्तित्व का केंद्र हैं, इसलिए उनका प्रबंधन पूरी पारदर्शिता और ‘सरबत दा भला’ की भावना से होना चाहिए।

एसजीपीसी की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र

संधवां ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ऐतिहासिक भूमिका का हवाला देते हुए इसे एक सम्मानित संस्था बताया। उन्होंने कहा कि एक सदी पहले इसी संस्था ने सामूहिक पंथिक शक्ति के बल पर ताकतवर ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया और गुरुद्वारों को आजाद करवाया।

उन्होंने कहा कि उस समय न तो कोई राजनीतिक ताकत थी और न ही आर्थिक बल, फिर भी गुरु की कृपा और विश्वास के साथ पारदर्शी ढंग से यह संघर्ष सफल हुआ।

सवालों को गंभीरता से लेने की अपील

स्पीकर ने कहा कि जब भी शिरोमणि कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह कोई सियासी कुश्ती नहीं, बल्कि कौम की पहचान और सम्मान का प्रश्न है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी खास परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रबंधन प्रणाली सुनिश्चित करने से जुड़ा है।

आलोचनाओं को निजी हमलों में न बदलें

संधवां ने अपील की कि सम्मानित धार्मिक शख्सियतों द्वारा उठाई गई चिंताओं को किसी व्यक्ति या परिवार को बचाने के लिए खारिज न किया जाए और न ही इन्हें निजी हमलों में बदला जाए।

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि पंथ के धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिए है।

एकता और सुधार का आह्वान

एकता की अपील करते हुए उन्होंने कौम से आग्रह किया कि इस मुद्दे को टकराव के बजाय सुधार की दिशा में ले जाया जाए। उन्होंने अरदास की कि ज्ञानी रघबीर सिंह और भाई रणजीत सिंह द्वारा जताई गई चिंताओं पर सुधार की भावना से गंभीरता से विचार किया जाए।

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