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Monday, 20 July 2026
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Air India AI-171 Plane Crash: Investigation Report पर उठे गंभीर सवाल

12 जून को हुए एयर इंडिया के विमान AI-171 हादसे की जांच रिपोर्ट अब विवादों में घिर गई है। इस रिपोर्ट को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं – सबसे बड़ा सवाल ये है कि रिपोर्ट बिना किसी आधिकारिक हस्ताक्षर के मीडिया में कैसे लीक हो गई? और क्या इसमें सिर्फ पायलट्स को दोषी ठहराकर विदेशी कंपनी बोइंग को बचाने की कोशिश की जा रही है?

क्या था हादसा?

AI-171 फ्लाइट एयर इंडिया की एक इंटरनेशनल उड़ान थी, जो उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद क्रैश हो गई। हादसा इतना भीषण था कि 240 से ज़्यादा यात्रियों की मौत हो गई। विमान में लगभग 300 लोग सवार थे।

बाद में सामने आया कि टेकऑफ के कुछ सेकेंड बाद ही विमान के दोनों इंजन बंद हो गए थे। इस वजह से प्लेन सीधे नीचे गिर गया।

लीक हुई जांच रिपोर्ट बिना हस्ताक्षर के

12 जून को हादसे की 15 पन्नों की जांच रिपोर्ट मीडिया में सामने आई। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि इस रिपोर्ट पर किसी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। यानी यह रिपोर्ट ऑफिशियली जारी नहीं की गई थी, बल्कि लीक की गई थी।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि:

  • इंजन फ्यूल स्विच “कटऑफ” पोजीशन में थे, यानी बंद थे।
  • इसका मतलब ये बताया गया कि पायलट्स की गलती से हादसा हुआ।

पायलट्स एसोसिएशन ने उठाई आपत्ति

Airline Pilots Association of India (ALPA-I) ने इस रिपोर्ट को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि:

“ये जांच एकतरफा है। बिना पूरी सच्चाई जाने पायलट्स को दोषी ठहराया जा रहा है। ये रिपोर्ट न तो पारदर्शी है और न ही निष्पक्ष।”

ALPA-I का कहना है कि रिपोर्ट में तकनीकी खामियों या डिजाइन फेलियर की जांच नहीं की गई, और बोइंग जैसी बड़ी कंपनी को क्लीन चिट देने की कोशिश की जा रही है।

बोइंग को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

AI-171 हादसे में इस्तेमाल हुआ विमान था Boeing 787 Dreamliner, जिसे अमेरिका की मशहूर विमान निर्माता कंपनी बोइंग बनाती है।
रिपोर्ट में बोइंग की किसी भी गलती या तकनीकी कमी की बात नहीं की गई, जिससे ये शक और भी गहरा गया है कि कहीं बोइंग को जानबूझकर बचाया तो नहीं जा रहा?

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • फ्यूल स्विच जैसी चीज़ें इतनी आसानी से खुद से कटऑफ पोजीशन में नहीं जातीं।
  • ऐसे में केवल पायलट्स को दोष देना जल्दबाज़ी भरा फैसला हो सकता है।

मोदी सरकार पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के लीक होने के बाद अब मोदी सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विपक्षी पार्टियों और कई सामाजिक संगठनों ने पूछा है:

  • सरकार ने इस रिपोर्ट को बिना साइन किए मीडिया में क्यों लीक होने दिया?
  • क्या भारतीयों की जान की कीमत पर विदेशी कंपनियों को बचाया जा रहा है?
  • अगर बोइंग की गलती है तो क्या सिर्फ पायलट्स पर इल्ज़ाम डालकर कंपनी को बचाया जा रहा है?

कुछ अहम सवाल जो अब देश पूछ रहा है:

  1. रिपोर्ट बिना साइन के बाहर कैसे आई?
  2. क्या हादसे के पीछे टेक्निकल फेलियर था, या सिर्फ मानवीय गलती?
  3. बोइंग की भूमिका की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हो रही?
  4. क्या सरकार विदेशी कंपनियों के दबाव में है?
  5. क्या मृतकों के परिवारों को कभी इंसाफ मिल पाएगा?

AI-171 विमान हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं था – यह देश की एविएशन सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल है।
जहां एक तरफ 240 से ज़्यादा मासूम लोगों की जान गई, वहीं दूसरी ओर सच को छुपाने और दोषियों को बचाने की कोशिशें नजर आ रही हैं।

देश उम्मीद करता है कि सरकार निष्पक्ष जांच करवाएगी, दोषी चाहे कोई भी हो – पायलट, कंपनी या कोई और, सबको जवाब देना होगा।

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