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Tuesday, 04 August 2026
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UP: सरकारी भवनों में प्रयोग होगा गाय के गोबर से बना पेंट, CM योगी का अधिकारियों को सख्त निर्देश।

UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सरकारी भवनों में गोबर से बने “प्राकृतिक पेंट” के उपयोग को बढ़ावा देने और डेयरी क्षेत्र को तकनीक व नवाचार से सशक्त बनाने की बात कही।

पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के गो संरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्वदेशी गायों की नस्लों को बढ़ावा देने के लिए मंडल स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने श्रेष्ठ गौ आश्रय स्थलों को पहचान देने और गाय-आधारित उत्पाद तैयार करने वाले संगठनों के लिए नवाचार एवं उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतियोगिताओं के आयोजन की भी सिफारिश की।

40,968.29 हेक्टेयर चरागाह अतिक्रमण मुक्त

इस बैठक में मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि 40,968.29 हेक्टेयर चरागाहों को अतिक्रमण से मुक्त किया गया है, जिसमें से 12,168.78 हेक्टेयर को हरे चारे के उत्पादन के लिए समर्पित किया गया है. इस पहल से ग्रामीण रोजगार भी उत्पन्न हो रहा है, जिसमें महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से शामिल हैं और कुल 21,884 “गौसेवकों” को प्रशिक्षित और तैनात किया गया है.

11.49 लाख गायों को आश्रय दिया गया

अधिकारियों ने बताया कि बरेली में, आईएफएफसीओ, आवंला के सहयोग से जैविक खाद और गोमूत्र प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना बड़े गो संरक्षण केंद्रों पर प्रगति कर रही है. मुख्यमंत्री को आगे बताया गया कि राज्य भर में 7,693 गौ आश्रय स्थलों में वर्तमान में 11.49 लाख गायों को आश्रय दिया गया है, जिनकी निगरानी सीसीटीवी कैमरों और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से की जा रही है. उन्होंने अधिकारियों को देखभाल करने वालों की तैनाती और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, भूसा बैंक की स्थापना, और पानी, हरे चारे और चोकर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

गरीबों को मिले दुधारू गाय

उन्होंने इन आश्रयों में नियमित पशु चिकित्सा दौरे पर भी जोर दिया. ‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहायता योजना’ के तहत, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन गरीब परिवारों के पास कोई पशुधन नहीं है, उन्हें गायें प्रदान की जाएं. इस पहल का उद्देश्य गाय सेवा को बढ़ावा देना और दूध की उपलब्धता के माध्यम से घरेलू पोषण को बढ़ाना है.

दूध की खरीद में वृद्धि

ख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि 2024-25 में, दूध की खरीद 3.97 लाख लीटर प्रति दिन (एलएलपीडी) तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की वृद्धि है. सदस्यता में 8% की वृद्धि हुई, और 24,031 दूध उत्पादकों को प्रशिक्षित किया गया. वित्तीय रूप से, कारोबार 1,120.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 16% की वृद्धि को दर्शाता है. भविष्य की योजनाओं के बारे में, यह साझा किया गया कि वर्ष 2025-26 के लिए लक्ष्य 4,922 नई सहकारी दूध समितियों की स्थापना और 21,922 मौजूदा समितियों को प्रशिक्षण प्रदान करना है.

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