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Monday, 05 October 2026
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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी

केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।

यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।

इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।

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