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Saturday, 05 September 2026
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पंजाब सरकार के फसल अवशेष प्रबंधन प्रयासों को मिली बड़ी सफलता: पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत कमी पर मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार

पंजाब ने पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया गया है। यह सम्मान पराली प्रबंधन में सुधार के लिए मिला है। सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। Gurmeet Singh Khudian ने इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।

क्या पराली जलाने की घटनाएं घटीं?

राज्य में पराली जलाने के मामलों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार इसमें लगभग 94 प्रतिशत कमी आई है। पहले यह समस्या बहुत बड़ी थी। हर साल हजारों घटनाएं सामने आती थीं। अब यह संख्या काफी कम हो गई है। यह बदलाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।

क्या किसानों ने बदली अपनी सोच?

इस बदलाव में किसानों की भूमिका सबसे अहम रही है। उन्होंने पराली जलाने की पुरानी आदत छोड़ी है। अब मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। इससे खेती का तरीका बदल रहा है। किसानों ने जिम्मेदारी दिखाई है। यह सोच में बड़ा बदलाव है। इसी वजह से यह सफलता संभव हो पाई है।

क्या सरकार ने दिया मजबूत साथ?

राज्य सरकार ने भी इस दिशा में लगातार काम किया है। Bhagwant Mann की अगुवाई में योजनाएं बनाई गईं। किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। मशीनों पर भारी सब्सिडी दी गई। इससे किसानों को विकल्प मिला। यह कदम असरदार साबित हुआ। सरकार और किसान दोनों साथ आए।

क्या मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा तेजी से?

फसली अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों की संख्या बढ़ी है। राज्य ने इसके लिए बड़ा बजट तय किया है। सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हजारों मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। इससे खेतों में पराली प्रबंधन आसान हुआ है। किसान अब तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह बदलाव लंबे समय तक असर डालेगा।

क्या पर्यावरण पर पड़ा सकारात्मक असर?

पराली जलाने में कमी से पर्यावरण को फायदा हुआ है। हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। मिट्टी की सेहत भी बेहतर हुई है। प्रदूषण का स्तर घटा है। लोगों को राहत मिली है। यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका असर जमीन पर दिख रहा है।

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