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Saturday, 05 September 2026
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दिल की बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज; आपातकालीन स्थितियों में सहायता प्रदान कर रही ‘’Mukhyamantri Sehat Yojana’

पंजाब की प्रमुख मुख्यमंत्री सेहत योजना स्वास्थ्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही है, जो प्रति परिवार 10 लाख रुपये की कवरेज प्रदान करती है और अचानक डॉक्टरी आपातकाल के दौरान वित्तीय बोझ को कम करते हुए समय पर इलाज लेने में सक्षम बनाती है। कई बीमारियां जैसे दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं किसी भी समय हमला कर सकती हैं, इसलिए पंजाब सरकार का दृष्टिकोण व्यापक स्तर पर जन स्वास्थ्य हस्तक्षेप के माध्यम से डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करने पर केंद्रित है।

 

दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं जैसी बीमारियां बिना किसी चेतावनी के हमला कर सकती हैं, जिससे अचानक गंभीर लक्षण पैदा होते हैं और गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होती है। यह सुझाव देता है कि ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां अक्सर गुप्त रूप से विकसित होती हैं और बिना किसी चेतावनी के हमला करती हैं, जिसके संबंध में फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है। पंजाब में इस बढ़ती चिंता को वित्तीय तैयारी के माध्यम से देखा जा रहा है, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी सरकार-समर्थित पहल का उद्देश्य डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करना है।

 

पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में चल रही यह योजना हर परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है। यह योजना सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर करती है।

 

बड़ी और गंभीर बीमारियों की छिपी शुरुआत को उजागर करते हुए विश्व स्वास्थ्य आंकड़े समय पर फैसला लेने की जरूरत को दर्शाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस लेने की समस्या जैसी बीमारियां हर साल विश्व भर में लगभग 75 प्रतिशत मौतों का कारण बनती हैं और बहुत से पीड़ितों को यह भी नहीं पता होता कि वे जोखिम में हैं। मोहाली के जिला अस्पताल की मेडिसिन की मेडिकल ऑफिसर डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि जब तक मरीज हमारे पास आते हैं, बीमारी अक्सर अगले चरण तक पहुंच जाती है। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ही बीमारी का पता लगाने से बेहतर नतीजों में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे अभी भी प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा नियमित जांचें बहुत कम करवाई जाती हैं क्योंकि लक्षणों का पता न लगना उनमें सुरक्षित होने की गलत भावना पैदा कर देता है।

 

डॉक्टरी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि जब आपातकाल आता है, तो समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल के दौरे या स्ट्रोक के इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है और यहां तक कि जान भी ले सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे पलों में मरीज आम तौर पर झिझक महसूस करते हैं। डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि इलाज शुरू होने से पहले ही परिवार अक्सर खर्चे पर विचार करने लग पड़ते हैं और यह देरी खतरनाक हो सकती है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी वित्तीय सुरक्षा योजनाओं से एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।

 

इस योजना को कवरेज से लेकर वास्तविक देखभाल डिलीवरी तक पंजाब भर में काफी बढ़ावा मिला है। अधिकारियों का कहना है कि 33 लाख से अधिक परिवारों को इस योजना के तहत नामांकित किया गया है, जिसमें खासकर डायलिसिस, कैंसर और दिल जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लाखों मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। पंजाब की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार इस योजना के तहत 33 लाख से अधिक लाभार्थियों को सफलतापूर्वक रजिस्टर किया गया है और 1,98,793 मुफ्त इलाजों को मंजूरी दी गई है, जिसकी राशि लगभग 3,30,01,32,533 रुपये बनती है। इस कुल राशि में से 59,34,18,468 रुपये पहले ही अस्पतालों को वितरित किए जा चुके हैं। हर उम्र वर्ग के लोगों, खास तौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, ने इस स्कीम से लाभ उठाया है, जिसमें दिल की सर्जरी और कैंसर की देखभाल जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जा रहा है।

 

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस पहल ने कई परिवारों के महंगे इलाज के खर्च को कम करने में मदद की है, जिनके लिए पहले उन्हें उधार लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारतीय संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय और सरकार द्वारा समर्थित अध्ययनों में यह सामने आया है कि कुल स्वास्थ्य देखभाल खर्च का लगभग 47 प्रतिशत लोगों की जेब से ही खर्च होता है।

 

प्रारंभिक संकेत जमीनी स्तर पर उत्साहजनक रुझानों की ओर इशारा करते हैं, हालांकि व्यापक मूल्यांकन अभी जारी है। इनमें मरीजों की अस्पताल में इलाज कराने की इच्छा में वृद्धि, आपातकालीन भर्ती में कम देरी और कुछ मामलों में शुरुआती चरण में जांच करवाने की प्रवृत्ति शामिल है।

 

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पूरे राज्य में समान स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को आर्थिक कठिनाइयों के कारण इलाज में देरी का सामना न करना पड़े। हम कवरेज बढ़ाने, अस्पताल नेटवर्क को बेहतर बनाने और क्रियान्वयन को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

 

नामांकन अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी लक्षित जागरूकता अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि लाभार्थियों को यह समझाया जा सके कि इस योजना का उपयोग कैसे और कब करना है। क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने, दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने और अस्पतालों तथा मरीजों दोनों के लिए एक सुगम और अधिक सुलभ अनुभव सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

 

इसके साथ ही, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल अभी भी एक महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जांच, शुरुआती परीक्षण और जोखिम कारकों की निगरानी अभी भी सीमित है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वयस्कों में से केवल एक चौथाई ने ही बुनियादी स्वास्थ्य जांच करवाई है, जबकि महिलाओं में कैंसर स्क्रीनिंग की दर 2 प्रतिशत से भी कम है। बीमारी का पता चलने पर स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

 

स्वास्थ्य आपातकाल की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन तैयारी को मजबूत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा, बढ़ी हुई जागरूकता और निवारक देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने से पंजाब में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब बीमारी बिना किसी चेतावनी के हमला करती है, तो इलाज मिलने में देरी और समय पर देखभाल के बीच का अंतर अक्सर ठीक होने और लंबे समय तक बीमारी के बने रहने के परिणामों को तय करता है। इसलिए, तैयारी केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन जाती है।

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