Live
गुरुग्राम जेल पहुंचे भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल, संजीव अरोड़ा से की मुलाकात2014 से अब तक आरबीआई से 14.29 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा लिए गए, फिर भी राज्यों को कुछ नहीं मिला: हरपाल सिंह चीमापंजाब में साइबर ठगों का नया जाल! “कॉकरोच जनता पार्टी” के नाम पर लिंक भेजकर हो रहा बड़ा स्कैम10 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई से लोगों में नाराजगीकेंद्र RBI का असाधारण लाभांश राज्यों के साथ सांझा करे, सेंट्रल बैंक की आज़ादी और वित्तीय मज़बूती की रक्षा करे: हरपाल सिंह चीमाCM भगवंत सिंह मान द्वारा अहम फैसला; भीषण गर्मी से लोगों को बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों का समय सुबह 7:30 बजे कियाडॉ. राज कुमार चब्बेवाल फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए आप का हलका इंचार्ज नियुक्तआवारा कुत्तों संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पंजाब सरकार पूरे राज्य में पूरी तरह लागू करेगी: CM भगवंत सिंह मानगुरुग्राम जेल पहुंचे भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल, संजीव अरोड़ा से की मुलाकात2014 से अब तक आरबीआई से 14.29 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा लिए गए, फिर भी राज्यों को कुछ नहीं मिला: हरपाल सिंह चीमापंजाब में साइबर ठगों का नया जाल! “कॉकरोच जनता पार्टी” के नाम पर लिंक भेजकर हो रहा बड़ा स्कैम10 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई से लोगों में नाराजगीकेंद्र RBI का असाधारण लाभांश राज्यों के साथ सांझा करे, सेंट्रल बैंक की आज़ादी और वित्तीय मज़बूती की रक्षा करे: हरपाल सिंह चीमाCM भगवंत सिंह मान द्वारा अहम फैसला; भीषण गर्मी से लोगों को बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों का समय सुबह 7:30 बजे कियाडॉ. राज कुमार चब्बेवाल फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए आप का हलका इंचार्ज नियुक्तआवारा कुत्तों संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पंजाब सरकार पूरे राज्य में पूरी तरह लागू करेगी: CM भगवंत सिंह मान
Sunday, 24 May 2026
Menu

केजरीवाल की एफिडेविट में उठाए गए प्रमुख तथ्यों में से किसी पर भी CBI को आपत्ति नहीं: आप

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तथाकथित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी रिक्यूजल अर्जी के तहत दाखिल किए गए नए हलफनामे पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अपने जवाब में, सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए किसी भी प्रमुख तथ्य का खंडन नहीं किया है, फिर भी उसका दावा है कि इसमें हितों का कोई टकराव नहीं है।

 

अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होकर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया था कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई की तरफ से पेश होते हैं, उन्हें ऐसे मामले सौंपते हैं जिनके लिए उन्हें फीस मिलती है। इसमें आगे कहा गया कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है और पैनल में शामिल होना और मामलों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। हलफनामे में कहा गया है कि ये तथ्य किसी भी वादी के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा करते हैं।

 

अपने जवाब में सीबीआई ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्हें फीस वाले मामले सौंपते हैं। सीबीआई ने आगे इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि पैनल में यह नियुक्ति और मुकदमों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। अगर यह हितों का टकराव नहीं है, तो फिर क्या है?

 

सीबीआई का कहना है कि यह हितों का टकराव नहीं है। क्या देश में इसी तरह से काम होता है? ये कोई कोरी चिंताएं नहीं हैं। ये रिकॉर्ड पर मौजूद स्पष्ट तथ्य हैं जो निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

 

सीबीआई ने आगे यह तर्क दिया है कि इस लॉजिक को स्वीकार करने का मतलब यह होगा कि जिन जजों के रिश्तेदार सरकारों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के पैनल में शामिल हैं, उन्हें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुद्दा पैनल में शामिल होना नहीं है। मुद्दा यह है कि मामले में पेश हो रहे वही सॉलिसिटर जनरल जज के निकटतम परिवार को हजारों फीस वाले मामले आवंटित कर रहे हैं।

 

यह सभी जजों के बारे में नहीं है। यह विशिष्ट और निर्विवाद तथ्यों वाले एक मामले के बारे में है। जब केस में बहस करने वाले एक ही कानून अधिकारी द्वारा 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए जाते हैं, तो यह कोई रूटीन काम नहीं है। इसे सामान्य कहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *