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Saturday, 25 July 2026
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Punjab पुलिस के ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ ने 2,358 भटके हुए युवाओं की Online पहचान कर उन्हें गैंगस्टरों के प्रभाव में आने से बचाया

कम्युनिटी पुलिसिंग को अगले स्तर पर ले जाते हुए पंजाब पुलिस ने अपने ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ के तहत भटके हुए युवाओं तक पहुंच को और तेज किया है। यह पहल ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के साथ-साथ एक अहम भूमिका निभा रही है। जनवरी से अब तक, कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सी.ए.डी.) की स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ के नेतृत्व में कई बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनका उद्देश्य अधिकारियों और सामुदायिक भागीदारों को कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जागरूक करना है।

 

‘गैंगस्टरों ते वार’ के निवारक पहलू के रूप में स्थापित यह कार्यक्रम युवाओं को आतंकवाद, गन कल्चर, नशाखोरी और अन्य नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने के लिए सकारात्मक विकल्प प्रदान करता है। पिछले चार महीनों में पांच संवाद सत्र आयोजित किए गए हैं और अगले आठ महीनों में 11 और सत्र आयोजित करने की योजना है, ताकि इसकी पहुंच का दायरा और बढ़ाया जा सके।

 

इस पहल के तहत पंजाब पुलिस सामुदायिक स्तर पर उन युवाओं की पहचान करती है, जो ऑनलाइन आतंकवाद, हिंसा या गैंगस्टर संस्कृति से प्रभावित हो सकते हैं। अब तक 2,358 युवाओं की पहचान सोशल मीडिया विश्लेषण के माध्यम से की गई है, जिनमें से 1,519 की प्रोफाइल राज्य स्तरीय ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ पर तैयार की गई हैं।

 

पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने कहा, “पंजाब पुलिस एक संतुलित दो-आयामी रणनीति पर काम कर रही है—‘गैंगस्टरों ते वार’ के माध्यम से सख्त कार्रवाई और ‘युवा सांझ’ के माध्यम से लगातार संपर्क व निगरानी। मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग, संरचित काउंसलिंग और परिवार की भागीदारी इस पहल का आधार हैं। जिन मामलों में गहन हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, उन्हें उप-मंडल स्तर के सामुदायिक केंद्रों को भेजा जाता है ताकि निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जा सके। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—अपराधी नेटवर्क को तोड़ना और युवाओं को उनसे दूर रखना।”

 

अब तक 1,490 युवाओं को जागरूक किया गया है, जबकि 1,109 ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया है। कुल मिलाकर 1,836 युवाओं की जिला खुफिया इकाइयों द्वारा काउंसलिंग की गई है, जबकि जिला टीमों द्वारा 522 अन्य ऐसे युवाओं की पहचान की गई है।

 

जमीनी स्तर पर, जिला ‘युवा सांझ’ समितियों का नेतृत्व कमिश्नर ऑफ पुलिस/सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा नामित सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस/डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के अधिकारी करते हैं। इन समितियों के माध्यम से सिविल सोसायटी के सदस्य, सेवानिवृत्त अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, एनजीओ और सामुदायिक प्रतिनिधि मिलकर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

 

स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ ने कहा, “जहां ‘गैंगस्टरों ते वार’ का उद्देश्य संगठित अपराध को समाप्त करना है, वहीं ‘युवा सांझ’ का उद्देश्य भटके हुए युवाओं की प्रारंभिक पहचान कर उन्हें सही मार्ग पर लाना है। हम आवश्यकता के अनुसार सख्ती या नरमी से पेश आते हैं, ताकि समय रहते हस्तक्षेप कर किसी युवा के जीवन की दिशा बदली जा सके।”

 

पुनर्वास की व्यवस्था सीपी/एसएसपी के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन और अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग से की जाती है। इसमें कौशल विकास, रोजगार से जोड़ना और आवश्यकता अनुसार वित्तीय सहायता शामिल है, ताकि युवाओं को नकारात्मक प्रभावों से दूर रखकर स्थिर और खुशहाल जीवन की ओर प्रेरित किया जा सके।

 

फाजिल्का के एसएसपी गुरमीत सिंह ने कहा,“इस पहल ने न केवल जमीनी स्तर पर अपराध दर को कम करने में मदद की है, बल्कि राज्य के युवाओं को असामाजिक तत्वों के साथ जुड़ने से भी रोका है। यह देश में किसी भी राज्य पुलिस द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की एक अनोखी पहल हो सकती है। पंजाब पुलिस ने युवाओं को अपने भ्रम दूर करने और वास्तविकता से रूबरू होने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान किया है।”

 

उन्होंने आगे कहा,“हमारे जिले में ही हमने कानून का पालन करने वाले युवाओं का एक मजबूत समूह तैयार किया है, जो राज्य की ताकत को और मजबूत करता है।

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