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Sunday, 13 September 2026
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पंजाब सरकार राज्य में ग्राम न्यायालय के मुद्दे पर सभी कानूनी विकल्पों की पड़ताल करेगी: CM भगवंत सिंह मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ग्राम न्यायालयों को लेकर केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे दबाव पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए इसे गैर-व्यवहारिक और कानूनी समुदाय के हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है और सभी कानूनी पहलुओं की गहन जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा संस्थागत अखंडता और जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका में कानून का राज और नैतिक मानदंड सर्वोपरि होने चाहिए।


65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बैठक

म्यूनिसिपल भवन में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य भर की 65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।

उन्होंने कहा, “पंजाब में अधिकांश लोगों की 20 किलोमीटर के दायरे में अदालतों तक पहुंच पहले से ही उपलब्ध है, इसलिए ग्राम न्यायालयों का यह प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है। वकील समुदाय पहले ही केंद्र के इस कदम के खिलाफ है, क्योंकि इससे राज्य सरकार को कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब में इस प्रस्ताव को रोकने के सभी विकल्पों की तलाश की जाएगी।


कानूनी विशेषज्ञों की कमेटी का गठन

सीएम मान ने घोषणा की कि पंजाब सरकार इस मुद्दे की गहन पड़ताल के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करेगी।

उन्होंने कहा, “मैं इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष उचित मंचों पर उठाऊंगा।”


वकीलों के हितों की रक्षा का भरोसा

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार वकील समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशनों ने देश की कानूनी प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज की बेहतरी के लिए लगातार काम किया है।

उन्होंने भारतीय संविधान की मूल भावना—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का राज आधुनिक लोकतांत्रिक समाज की नींव है।


मुफ्त कानूनी सहायता का सुझाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में न्याय भी महंगा होता जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि वकील समाज के कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की स्थापना पर विचार करें।

उन्होंने कहा, “मुकदमे जीते या हारे जा सकते हैं, लेकिन कानून का राज हमेशा कायम रहना चाहिए।”


वकीलों की मांगों पर विचार

मुख्यमंत्री ने वकील सुरक्षा एक्ट लागू करने और चैंबरों के कमर्शियल बिजली कनेक्शनों को घरेलू कनेक्शन में बदलने सहित वकीलों की विभिन्न मांगों को जायज बताते हुए कहा कि इनकी समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा, “मैं स्वयं को जनता का वकील मानता हूं और समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।”


‘नियुक्ति भवन’ का उल्लेख

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने म्यूनिसिपल भवन को ‘नियुक्ति भवन’ बताते हुए कहा कि यहां 63,000 सरकारी नौकरियों में से लगभग 50,000 नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।


लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने आम लोगों के हित में कई लोक-हितैषी और नागरिक-केंद्रित फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है। सत्ता के दौरान महलों में रहने वालों ने अपने घरों के दरवाजे जनता के लिए बंद कर दिए थे, लेकिन जनता ने समय आने पर जवाब दिया।”

इससे पहले पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला।

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